Selfie ~accident with truth Conclusion part1

'डबल मर्डर' केस को साल्व करने का दावा,तस्वीर ने खोले दम्पति हत्या के राज ।इन जैसे अनेकों हेडलाइंस ने अगले दिन के अखबारों में रोचकता के नए  अंधियार भरे किरणों का संचार  तो बहुत ही सहजता से कर दिया लेकिन  तिवारी लॉज के कर्ता धर्ता  दीनदयाल को गहरे सदमे और शर्म के दलदल में भी बखूबी पहुँचा दिया।
     "कहाँ भगा दिया है अपने बेटे को? कितना चुराया? तुम्हारा हिस्सा कितना होगा"इंस्पेक्टर शर्मा ने एक के बाद एक प्रश्न दागते हुए पूछा।वह बुढा शरीर मानो मर गया हो,एक भी शब्द हलक से न निकल पाया,उसे अभी तक यह विश्वास नही हो पा रहा था कि उसके बेटे विशाल ने ऐसा किया है।
          मुखबिरों को कान खड़ा रखने के लिए कहा जा चुका था,पुलिस महकमा बहुत ही गम्भीरता से विदेशी पर्यटकों की हत्याओं से पर्दाफाश करने में जुटा था।पुलिस अगर ठान ले तो  रेत में खोई सुई भी खोज सकती है ,ये तो एक जीता जागता इंसान था।आखिरकार विशाल पकड़ा गया।
       अच्छी खातिरदारी के बाद ,विशाल ने सच उगलना शुरू किया। क्लाइरा जब अक्टूबर में अपने कम्पनी के प्रमोशन के सिलसिले में बनारस आयी तब उसकी मुलाकात 6 फुट कद वाले, हष्ट -पुष्ट शरीर,सुंदर भरे हुए चेहरे वाले विशाल से हुई। अनोखे सवांद शैली से सहज ही किसी को अपनी तरफ़ आकर्षित करने का गुण उसमे बखुबी छुपा हुआ था।गाइड होने का ढोंग रचके ,विदेशी पयर्टकों से दोस्ती बना कर  स्वच्छ लूट-पाट करना उसके लिए आम बात हो चुकी थी लेकिन क्लाइरा के जीवन के दर्द में उसे एक नई आशा दिखी।
      अपने दर्द को साँझा करते हुए उसने मारिया का जिक्र किया,यू तो वह इंग्लैंड में उसकी पड़ोसन थी लेकिन क्लाइरा  के अनुसार  मारिया सिर्फ  एक चालबाज़ महिला थी ,जो उसके पति को फसाकर  पीटरसन परिवार के अपार सम्पत्ति पर अपना अधिकार चाहती थी।
        क्लाइरा को हरदम से एक कन्धे की तलाश थी,जिसपर सर रखकर वह रो सके अपने दुख दर्द बाट सके और उन घाट के सीढ़ियों पर  अक्टूबर के हल्की हल्की धूप में उसे वह सहारा मिल गया था,लेकिन वह भविष्य से अंजान थी कि की यही लम्हा उसके मौत के रहस्य को उजागर करेगा और जरिया बनेगी एक तस्वीर।

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