Selfie An accident with Truth part 2

'You have to look very carefully Mr Vijay , the death of two foreigner must be explained precisely and logically"इंस्पेक्टर विजय शर्मा को केस सौंपते हुए कमिश्नर साहब ने बेहद संजीदा भरे लहजे में बोला। "I will try my level best , Sir"  केस फ़ाइल को संभालते हुए इंस्पेक्टर बोले।
                              तमाम अदब से परे ,समाचारपत्रों  में नए  नए किस्से छापे जाने लगे।मामला बहुत ही तूल पकड़ता जा रहा था,"हो भी क्यो न विदेशी जो मरे है,अगर  अंग्रेज दम्पति के जगह ऐसा एक किसान परिवार के साथ हुआ होता तो कोई पूछने वाला नही होता"इंस्पेक्टर विजय की बेटी अंकिता ने अखबारों के हद से ज़्यादा संजीदा होने पर तंज कसते कहा। "बेटा मुझसे क्या ,मुझे तो केस साल्व करना है ,एक गरीब का हो या अमीर का,अपराध अपराध ही होता है" इंस्पेक्टर खुद की पीठ थपथपाते बोले।
                   डबल मर्डर को पाँच दिन से भी ज्यादा हो चुके थे, और बनारस की पुलिस एक भी सुराग जुटाने में  अब भी असमर्थ थी।प्राम्भिक जाँच करने वाली पुलिस टीम डबल मर्डर के पीछे वज़ह को सूँघ भी नही पाई थी,।तिवारी लॉज को पूरी तरह सीज कर दिया गया था और क्योकि यह मामला बेहद ही उच्च प्रोफाइल होता जा रहा था,क्राइम ब्रांच को मामला सौपा जा चुका था और तफ्तीश कर रहे अस्सी थाना  प्रभारी को इंस्पेक्टर विजय को हर सम्भव मदद करने हेतु तैयार रहने का निर्देश दिया जा चुका था।
                  "चलो  इसी बहाने मामा  यहाँ जाने को तो मिलेगा,इतने नज़दीक लखनऊ में  होने के बाद भी बनारस गए एक साल हो गए"अंकिता खुश होते बोली। लखनऊ में पोस्टेड इंस्पेक्टर विजय साहब को बनारस में ही डेरा डालने का आदेश मिल चुका था ,क्योकि उनका ससुराल भी बनारस में ही था इसलिए उनकी  15 वर्षीय बेटी अंकिता बहुत ही ज्यादा खुश थी ।" मामा ने मुझे मेरे जन्मदिन पर फ़ोन दिलाने का वादा किया है,और देखिए ना मेरा जन्मदिन भी वही मनेगा"खुसी जाहिर करते अंकिता बोली।
                "सर   पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार दोनों की मौत अलग अलग समय हुई है और कमरे में जबर्दस्ती घुसने के भी कोई निशान नज़र नही  आए थे और ना ही कोई कीमती सामान वो लेकर आए थे" "यह तुम्हे कैसा पता कि वो कुछ खास लेकर नही आए थे और यह सुसाइड भी कत्तई नही है" इंस्पेक्टर विजय अपने तजुर्बे का इस्तेमाल करते  हुए बोले।
"यह कुछ और ही मामला है"कहते हुए इस्पेक्टर ने उस कमरे का रुख किया जहां जिंदगी और मौत के रहस्य दफ़न थे।
        बहुत ही गहन खोजबीन ओर चिंतन के बाद इंस्पेक्टर इस बात को लेकर पूरे आश्वस्त हो चुके थे कि यह कोई सुसाइड नही है।पोस्टमार्टम के रिपोर्ट भी यह जाहिर कर रही थी कि जैसा कट मिसेस पीटरसन के हाथ में लगाया गया था वह ख़ुद नही किया जा सकता था।"अंदर कमरे में कोई तीसरा शख्स जरूर था ,जो जाना पहचाना था "यह मेरी सिक्स्थ सेंस कह रही है, "एक काम करो क्राइम ब्रांच के फोरेंसिक टीम को पूरे कमरे की फिर से गहन जांच करने को बुलावो" और हाँ इस लॉज में काम करने वाले सभी मुझे नीचे हाल में जमा चाहिए "आदेश देते इस्पेक्टर  विजय ने रुआब से बोला।

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