Selfie - An accident with truth Part 3

तिवारी लॉज जो 35 वर्षो से अस्सी घाट के दीदार करने वाले दूर दूर से आए सैलानियों के लिए रहने और खाने की उत्तम सुविधा देता आ रहा था ,उसकी भी साख आज दाव पर लग गई है,।आज़तक एक मांश का टुकड़ा भी जहाँ अंदर न गया हो ,वहां से दो लाशों का बरामद होना खुद दीनदयाल त्रिपाठी को भी शर्म लाज और हैरत में हर पल खाए जा रहा था। अपने जीवन के 35 साल  के मेहनत के बाद जो इज़्ज़त मिला   था,वह धीरे धीरे डूबि जा रही थी।
                 "जो भी कांड में शामिल है ,वह अपने आगे आ जाए नही तो इतने डंडे पड़ेंगे की नानी याद आजाएँगी"पुराने पुलिस के हथकंडों अपनाते इंसपेक्टर  गुस्से से बोले।
   "साहब मैंने बयान में और अब भी यही कहा रहा हु की यहाँ का कोई भी कुछ नही जानता ,सभी लोग उस दिन छुट्टी पर थे सन्ध्या,हमारी रिसेप्शनिस्ट को छोड़कर ,आप चाहें तो रजिस्टर देख ले"दीनदयाल बचाव करते बोला। इंस्पेक्टर ने अपनी नज़र सन्ध्या के तरफ़ फेरी ,"सर में अपने मंगेतर के साथ चार घण्टो के लिए शॉपिंग करने चली गयी थी ,दीनदयाल सर को बता के" कोई सवाल पूछने से पहले ही सन्ध्या तोते की तरह बोल पड़ी।
                        लॉज में काम कर रहे लोगो से  पूछताछ में कुछ खास सुराग नही मिल पा रहा था ,और कोई भी कर्मचारी कत्ल के दौरान उस होटल में मौजूद नही था ।आसपास के दुकानों  और लोगो से भी कुछ स्पष्ट जानकारी नही मिलता देख इंस्पेक्टर विजय ने  लॉज मे काम करने वालों के घर वालो का ब्यौरा भी निकालने को बोला,और ख़ुद उन्होंने  लन्दन एम्बेसी  फ़ोन लगाकर यह अहम जानकारी निकाल ली कि मिसेस पीटरसन इसके पहले भी भारत आ चूंकि है और वो भी  बनारस शहर में करीब एक हफ्ता रुकी हुई थी  करीब एक साल पहल अक्टूबर में।
                    इंस्पेक्टर साहब ने तिवारी लॉज में काम करने वाले सभी कर्मचारियों और उनके परिजनों के बॉयोडाटा और उनके फोटोज को अपनी पैनी निगाहों से स्केन किया और हैरत में बोले कि दो बड़े कंपनियों के मालिक और इतने धनी पीटरसन परिवार को इतने छोटे,टूटे फूटे,लॉज में रहने की क्या जरूरत आ गयी थी ,ये मेरी समझ  में नही आ रहा,वह यह गहन सोच में डूबे ही हुए थे कि उनकी बेटी का नम्बर उनकी स्क्रीन पर आया ,और वह तुरंत बिना कुछ कहे अपने ससुराल को निकल पड़े।
                          अंकिता का जन्मदिन था पूरे घर में खुशी का माहौल था और आज अंकित को अपनी नए सेलफोन गिफ्ट का भी इंतेज़ार था लेक़िन उसके पिताजी हर बार की तरह आज भी समय पे नही पहुँचे थे,। "आप आ गए पापा ,जल्दी आईये केक काटते है "हाथ पकड़ते अंकिता बोली  ।केक काटा गया ,धीरे धीरे जशन खत्म हुआ, सब मेहमान चले गए ,अंकिता  ने अपना गिफ्ट सेलफ़ोन पापा को दिखाते बोला देखिए न कितना अच्छा है ,इसमें मैंने अपने पुराना मेमोरी कार्ड भी डाला है देखिए ना पापा"
            इंस्पेक्टर साहब ने चश्मा लगाया और फ़ोल्डर दर फोल्डर घूमने लगे ,बहुत ही अंत में उन्हें एक फोल्डर नज़र आया "sweet selfie" उस फोल्डर में  तस्वीरों को देखते ही आस्चर्य और हैरत भरे नज़रो से उन्होनो पूछा "तुम और तुम्हारी माँ बनारस कब आए थे?"   पिछले साल पापा अक्टूबर में,  हम घाट भी तो गए थे ,बहुत तस्वीरें हमने ली थी खूब घूमे थे ,हम लोगो ने खूब मस्ती किया था "उन लम्हों को याद करते हुए खुशी से अंकिता बोली । इंस्पेक्टर विजय शर्मा की आँखे फटी की फटी रह गई जब उन्होंने एक तस्वीर में अपने बेटी और पत्नी के अलावा ,दूर घाट की सीढ़ियों पर पीछे की तरफ  क्लाइरा पीटरसन जैसी दिखने वाली महिला को देखा। उन्होंने तुरंत ज़ूम किया और क़ातिल को पहचानते हुए ,शातिराना अंदाज में मुस्कुराते हुए  अपने सेलफ़ोन से एक नम्बर डायल किया और बोला
"THE  double murder CASE has ben SOLVED  bY A SELFIE".

"What!!!!"the voice exclaimed

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