Selfie ~An introduction with truth part 1

बड़े अदब से  मुस्करा रहा था, टूट कर बिखरने के बाद  भी उसने अदब छोड़ना मुनासिब न समझा, दो आँखे एकटक उसे देख रही थी मानो की नायाब नक्कासी को अपने अंदर  समेट लेना चाहती थी। एक अजीब सन्नाटा फैला हुआ था उस कमरे में,बाथरूम के बल्ब की रोशनी ठंडे पड़ते जा रहे मिस्टर पीटरसन को गर्म करने की कोशिश में लगी हुई थी ।कमरे के एक कोने में आँखों में आँसू लिए  उनकी मिसेज खुली खिड़की के बाहर  सहमी नज़रो से देख रही थी।उनके अंदर का डर और ग़म  एक नई जिंदगी को जीने के चाह में धीरे -धीरे कम पड़ते जा रहे थे।वह मौत के खौफ़नाक मंज़र में  अपने आने वाली सुखी जिंदगी की कल्पना भी करने लगी थी।
                       पंखे से लटके मिस्टर रिचर्ड पीटरसन के   झुकी हुई दोनों हथेलियाँ, जिंदगी के खात्मे की तरफ इशारा कर रही थी।30 साल की क्लाइरा पीटरसन ,अपनी जिंदगी में किसी मुर्दे को पहली दफा देख रही थी,वैसे  तो उन्होंने बहुत से थ्रिलर नॉवेल्स में मौत के बाद कि स्थिति को पढ़ा था लेकिन आज उन सभी के सामने यह मौत फीकी लग रही थी।
           कमरे में पसरे डरावनें सन्नाटे को चीरते हुए एक आवाज ने क्लाइरा को उसके बीते हुए जीवन से लाकर आज के माहोल में खड़ा कर दिया "what are you doing Claira?,we have not enough time ,just arrange all things at proper places,so that it looks like a suicide"           यू तो डरावने माहौल में अपनी भाषा ही जुबान से निकलती है लेकिन क्लाइरा को समझाने के लिए  अपने अंग्रेजी ज्ञान का भरपूर इस्तेमाल करता हुआ,विशाल  सूखते जुबान से बोल पड़ा।
           क्लाइरा अपने गाइड दोस्त,भावी हमसफ़र  विशाल को बहुत चाहती थी,चाह इतनी बढ़ गयी कि थी कि आज मिस्टर रिचर्ड पीटरसन पंखे से कमरे के बीचोबीच लटकते हुए एकटक निगाहों से टूटे नक्कासीदार कांच के टुकड़े को देखे  जा रहे थे। क्लाइरा ने बहुत बेदर्दी दिखाते हुए उनके नज़रों के इस सहारे को भी छीन कर दूर कर दिया,अब नज़रे फर्श के सन्नाटे का दीदार कर रही थी।
                 पूरे कमरे की सफाई करने के बाद ,बाथरूम की तरफ जा कर उसने बोला"I have cleaned the glasses and arranged the room". "ok, do one more thing, just look over the reception ,is there anyone"विशाल ने तस्सली करने के लिए पूछा। तस्सली करके क्लाइरा ने सोफे का रुख किया ,उस न बीतने वाले समय को काटने के लिए उसने पास पड़े विशाल के सेलफोन को देखना या यूं कहें कि पहला दफा खंगालना  शुरू किया।
                   गैलरी के सबसे अंत में एक फ़ोल्डर दिखा"Sweet Selfie" ,अंगूठे ने उसके तरफ रुख किया और देखते ही देखते होश फाख्ता ,सभी आशा निराशा में बदल गए थे। वह सभी सपने जो उसे दिखाए गए थे टूटते नज़र आ रहे थे ,अपनी भरी गृहस्थी को उसने पहले ही उजाड़ दिया था गुस्से से तिलमिलाई वह कुछ बोल पाती ,उससे पहले उसके नज़रो ने  धारदार बटर नाइफ को खोज लिया,और अभी कुछ कदम ही बाथरूम की तरफ़ बढ़ा पाती, की दरवाजा खुला और टॉवेल में लिपटा विशाल निकला, वह तेजी से उसकी तरफ़ बढ़ी "Why you have betrayed me Vishal?Why?"
            गहमागहमी के बाद  अजीब सन्नाटा फिर छा गया,लेकिन अब  चिकने फर्स पर खून की मोटी धारो को बहते देखा जा सकता था,उस छिछली  नदी में मिस्टर पीटरसन के लटकते हुए शरीर की छाया  भी अच्छी तरह दिख रही थी।इंसान की जरूरतें आदत कब बन जाती है उसे ख़ुद भी पता नही चलता। तस्वीरें सच का आईना होती है, तस्वीरें यादगार लम्हों को  सँजोती है,लेकिन असल सच को उजागर करने का माद्दा भी रखती है।जीवन के असीमित चाह और लालच को बताने का जरिया बनी एक तस्वीर
Selfie
Part 2 will be coming soon

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