Unshared Love
"जीवन में न सँगीत लिखेंगे,
केवल तन्हाई का गीत लिखेंगे।
वो जब तक न मिल जाएगी,
केवल उसके ख़ातिर ही प्रीत लिखेंगे।"
डायरी के सबसे आख़िर पन्ने में दर्ज पंक्तियों में उसने अपने गहरे जज़्बात छुपा रखे थे।ऐसे जज़्बात जिनसे ख़ुशबू आती हो वफ़ा की,कल्पना एक चाहत की जो पहली हो लेकिन अंतिम भी,चाहत जिसमें फ़रेब नही था,उम्मीद जो बहुत वाज़िब लगती थी ,लेकिन उसका मुमकिन होना थोड़ा कठिन।
"आज के ज़माने में इन पुरानी खयालातों को ढोना ,मतलब जिंदगी और जवानी पर रोना" हँसते हुए निखिल ने तंज कसा।
निशांत ने बहुत ही शांत स्वर में जवाब दिया"अब चाहे यह घिसे -पिटे ख़यालात ही क्यो न हो ,ये हैं तो मेरे अपने ही,मेरा इनपर ऐतबार पक्का है"
"घण्टा ऐतबार और यह तुम्हारा डेस्टिनी वाला प्यार ,अगली जिंदगी में नसीब होगा तुम्हे ,तब तक भरते रहो यह डायरी,लड़की पटानी पड़ती है , आज के जमाने मे डेस्टिनी माने डस्टबिन "
असलीयत को समझो और मुझसे कोचिंग लो, अपनी दोस्ती है,इसलिए फ़ीस नही लूँगा।
निखिल जैसे बहुत दोस्त निशांत के इन जज्बातों को आज के ज़माने के हिसाब से सोचते थे और उसे बकवास ही मानते थे।कॉलेज के पहले दिन से ही उसे "स्टड" और "माचो" बनने की फ्री सलाह भी मिलती रहती थी। निशांत भी देखा करता कि "I love u" के अचूक हथियार का प्रयोग उसके दोस्त कितनी होशियारी से कर लेते थे" प्यार के नाम पर "कटना" और "काटना" जैसे शब्द उसके लिए अभी थोड़े नए थे और हजम करने के लिए बहुत कठिन।
कालेज इस दुनिया मे होकर भी एक अलग दुनिया है ,कॉलेज एक कोलाज है कहानियों का जिसमे सभी किरदार अनोखे है ,कहानिया एक से बढ़कर एक,किरदार तो कहानियों से भी बढ़कर।ऐसा ही कॉलेज के जिंदगी का एक हिस्सा निशांत भी था।
उसकी जिंदगी में कुछ किताबें ,माँ-बाप के सपने और एक मुश्किल खोज जो उसे अन्य से अलग करती थी।जीवन के इस दौर में किसी को रिझा के अपना बना लेना तो आसान है ही लेकिन उस रिश्ते को जिंदगी के अगले दौर में ले जाना लगभग नामुमकिन ।
निशांत का जीवन इतना संजीदा कैसे हो सकता है?इतनी कम उम्र में इतनी गंभीरता कैसे?ये सवाल उसके दोस्त निखिल को बहुत कचोटते थे ।जहाँ सभी के लिए कॉलेज की जिंदगी एक दो साल के मौज मस्ती का एक अहम मौक़ा थी,निशांत के लिए इतनी भारी भरकम सोच और जज़्बात को ढोना कैसे हो सकता था।ऐसा भी नही था कि वह बहुत पढ़ाकू और किताबी कीड़ा था,लेकिन अपने जिंदगी के इस हिस्से को लेकर वह बहुत ही सजग रहता था।
"मैं झूठे वादों के छलावे पर अपने जीवन के अहम एहसास को खोना नही चाहता, मैं इन्हें बचाकर रखना चाहता हूँ ,उसके लिए जो केवल मेरी होगी " निशांत ने निखिल के कुछ सवालों का जवाब देते हुए कहा।
"ये बता तुझे वो मिलेगी कैसे" ।"वो मुझे नियति मिलाएगी,यकीन है मुझे" कहते निशांत बात टाल के जाने लगा ।
"नियति नही नियत होती है रिश्तों के बनने के कारण ,कोशिश करनी होती है,पापड़ बेलने होते है और क्या भरोसा जो तुझे जो डेस्टिनी मिला दे ,वो तेरा काटेगी नही"निखिल ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए कहा। " हर एक चीज़ का तरीका होता है ,पहले दोस्त बनती है ,फिर गर्लफ्रैंड और बाद में शायद कही पत्नी " निखिल ने इस दफा तार्किक बात रखी ।
निशांत को समझाने के बहुतेरे प्रयास किये जाते ,लेकिन उसकी सोच में अंतर कोई न ला पाता ।वह लड़कियों से दोस्ती तो करता लेकिन अपने जीवन -साथी के अधिकार को बटने नही देता था ,एक ऐसा साथी का जिसका अंदाजा उसको थोड़ा भी न था ।उसकी इस सोच और नादानी पर हसने वाले लोग भी बहुत थे लेकिन इस पर उसे दाद देने वाले लोग भी कम न थे ।
कॉलेज को एक लंबा अरसा बीत चुका है,अब निखिल होटल मैनेजमेंट कर एक प्रतिष्ठित होटल का मैनेजर बन चुका था। एक दिन उसके होटल में एक युगल आता है ,निखिल को लड़के का चेहरा कुछ जाना पहचाना लगता है ,वह अभी कुछ पूछ पाता उससे पहले लड़का ही बोल पड़ा "निखिल तू तो एकदम नही बदला ,मुझे पहचाना, मैं निशांत और यह मेरी पत्नी नव्या "
निखिल फ्लेशबैक में चला गया लेकिन कुछ बोल न सका
"तू हमेशा कहा करता था कि डेस्टिनी सच्चा प्यार नही दे पाती है ,आज मैं तुझसे कह सकता हूं कि यार तू गलत था आजतक यह पल मैंने बचा कर रखे थे ,किसी के साथ नही बाटा मेरी डायरी में लिखी हुई लाइन्स, बिल्कुल सच हो गई"
निखिल की आँखे भर आईं ,उसे अपने गलत होने पर आज फक्र हो रहा था।
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